Saturday, October 30, 2021

वही एक मात्र सहयोगी है जो सर्वत्र होते हुए भी दिखता नहीं

 जैन दर्शन में ज्ञान से अभिप्राय सम्यक्ज्ञान से है और यही प्रमाण है। जिस प्रकार से जीव एवं अजीव पदार्थ अवस्थित हैं, उस प्रकार से उसको जानना सम्यक् ज्ञान है। 




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