Saturday, October 2, 2021

तनहा जीवन

जख्म मिटते नहीं लेकिन उसके दर्द को सहने के हम आदी हो जाते हैं।अपनों से मिले जख्म का दर्द भी अपना ही होता है जो शुरू में बहुत गहरा होता है लेकिन समय के साथ - साथ मिटता चला जाता है। क्या आप जानते हैं कि मुर्दे भी रोते हैं ! जी हाँ रोते हैं पर उनके रोने को देखने - समझने वाले उनके पास नहीं होते । 

पैसा अगर कंगाल कर दे तो वर्दाश्त हो जाता है लेकिन रिस्ते अगर कंगाल कर दें तो दिल फोड़े सी दर्द में डूब जाता है ।

यह जीवन भी एक गहरा राज है । लोगों की निगाह में हम भरे - पुरे हैं लेकिन अपनीं निगाह में जब हम स्वयं को देखते हैं तो देख नहीं पाते । देखने की हर कोशिश नाकामयाब रहती हैं क्योंकि आँखों का टपकना बंद ही नहीं होता । 

लोगों को सभीं देखते हैं लेकिन शायद ही हजारों में कोई एक मिले जिसके पास इतनी हिम्मत हो की वह स्वयं को देख सके। हम जो हैं , उसे हम स्वयं नहीं जानते लेकिन लोग यह तो जानते ही हैं कि हम कौन और कैसे हैं और इसके अलावा और  बहुत सी बातों को जानते हैं जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते ।

इस संसार में अकेला कोई नहीं रहना चाहता लेकिन समय कब और कैसे किसी को अकेले रहने के लिए बाध्य कर दें , कोई नहीं जानता। साथ रहने में हम खुश नहीं और तनहा जीवन को एक श्राप समझते हैं - यह कैसी हमारी सोच है ? हम कहीं टिकते क्यों नहीं । साथी की तलाश  सब को है लेकिन साथ निभाने की सोच वाले बहुत कम हैं।

सांसों की गिनती पर यह जीवन टिका है और उलटी गिनती गर्भ में आते ही शुरू हो जाती है । कब और कहाँ , यह उलटी गिनती समाप्त हो जाय , आज तक इस कुदरती राज को कोई नहीं जान पाया। जहाँ बुद्धि की सीमा समाप्त होती है वहाँ से नसीब की सीमा शुरू होती है।

मनुष्य की जीवन - यात्रा अपनें में एक रहस्य है ; इस यात्रा में हम कभीं मिलते हैं , कभीं जुड़ा होते हैं , कभीं रोते हैं और कभीं हँसते भी हैं और इनसे गुजरते - गुजरते एक दिन स्वयं गुजर जाते हैं ।

// क्रमश अगले अंक में ~~~






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