राग वैराग्य की सीढ़ी है - जो लोग ऐसा समझ कर भोग की यात्रा कर रहे होते हैं , वे समझो योग की यात्रा पर हैं और एक दिन भोग को धन्यवाद् करके वैराग्य के आनंद में मस्त हो जाते हैं । वैराग्य की अलमस्ती उनको कैवल्य में पहुँचा देती है
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