^^ सोनभद्र पुर्वाञ्चलका एक नया जनपद जो प्रकृतिका माइका सा है और जो गंगा - सोन दो
बड़ी -बड़ी नदियोंके मध्य बसे हुए होनें पर भी प्यासा है । मैं पिछले 60 साल से इस क्षेत्रको देख रहा हूँ ,यहाँ कौन -कौन से लोग नहीं आते -जाते लेकिन जो आते हैं लगते तो हैं अवतारी पर निकलते हैं महान लुटेरे ।
^^ यहाँ क्या नहीं है ? और क्या है ?
* यह क्षेत्र प्रकृतिका माइका है अतः यहाँ क्या नहीं है का अंदाजा लगाना संभव नहीं । यह क्षेत्र प्रकृति का कुबेर है जहाँ सीमेंट ,अलमुनियम,कोयल , बिजली एवं अन्य प्राकृतिक संपदाओंका अपार भण्डार है पर यहाँ जो लोग रहते हैं , उनके लिए कुछ नहीं है एक पान -सुपाड़ी और तंबाकू को छोड़ कर ।
* यहाँ के लोगों का दिन तम्बाकू के सहारे , रात स्वप्न के सहारे और जीवन मृत्युके इन्तजार में कटता है ।
## कुछ और बातें अगले अंक में ##
~~~ ॐ ~~~
Tuesday, October 21, 2014
सोनभद्र की कहानी उसकी जुबानी
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