Sunday, October 19, 2014

द्विज शब्द क्या कहता है ?

● द्विज शब्दका इशारा किधर को है ?
 <> अब्यक्त भाव को ब्यक्त करनें की कोशिश में अब्यक्त भावकी अनुभूति से निकला योगी शब्दों की रचना करता है । शब्द जबतक सिद्ध योगी तक रहते हैं , उनमें प्राण होता है लेकिन वही शब्द जब भोगी के मुख से निकलते हैं तब वे मुर्दे होते हैं । 
 <> अब्यक्त भाव की अनुभूति ही समाधि की अनुभूति है जो मनुष्य को मनुष्य से द्विज बनाती है द्विजका अर्थ है वह जिसका दुबारा जन्म हुआ हो ।दुबारा तो सबका जन्म होता है लेकिन द्विजका जन्म गर्भ से नहीं होता , साधना में उसका जो रूपांतरण होता है ,वह उसे द्विज बना देता है ।द्विज ,बुद्ध , प्रज्ञावान ,सिद्ध ये सभीं एक दुसरे के पर्यायवाची शब्द हैं । 
 # भागवत ( 12.4 ) में चार प्रकार की प्रलय बताई गयी हैं जिनमें एक है आत्यंतिक प्रलय। 
* आत्यान्तिक प्रलय क्या है ? 
> आत्मा का ब्रह्म से एकत्व स्थापित होना ही आत्यंतिक प्रलय कहलाती है । आत्मा और ब्रह्म का एकत्व अर्थात :--
 " साधनाके मध्य जब गुण तत्त्वों की ग्रेविटी से साधक बाहर निकलता है तब उसका मन -बुद्धि दर्पण निर्मल हो जाता है । निर्मल मन -बुद्धि दर्पण , आत्मा - व्रह्मके एकत्व को दिखाता है और जो देखनें वाला होता है वह अपनें को शरीर से बाहर देखता है ( out of body experiencing ) और ऐसे को द्रष्टा या साक्षी या बुद्ध कहते हैं ।"
 * द्विज बुद्धका पर्यायवाची शब्द है ।
 ~~~ ॐ ~~~

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