Tuesday, October 7, 2014

है तो समझदार पर ...

# हम देखते तो बहुत हैं , कभीं -कभीं ऑंखें भी थक जाती हैं पर जो देखते हैं उसके बारे में गंभीरता से सोचते कम हैं । 
# मौसम का पूर्वानुमान मनुष्य को छोड़ कर अन्य सभीं जल -चर , स्थल -चर और नभ -चरों को होता है लेकन मनुष्य विज्ञानका स्वामी होते हुए भी इस बिषय से अनभिज्ञ है ,ऐसा क्यों ? 
# संसारमें एक नज़र डाल कर देखना ,आपको हैरानी होगी यह जानकर , एक मक्खी से लेकर बड़े से बड़े जीव तक , चाहे जीव कितना भी बिशाल देह वाला हो जैसे डाईनासूर , जिराफ , ऊँट या हांथी , इन सभीं अति शुक्ष्म और विशाल काय जीवों के शरीर की रचना कुछ इस तरह से होती है , इनकी नाक जमीन के करीब होती है पर मनुष्य की नाक जमीन से दूर रहती है । क्या कारणों में एक प्रमुख कारण यह नहीं हो सकता , हमें इस बात का बहुत कम ज्ञान हो पाता है , अगले 24 घंटों में कुदरत में क्या घटने वाला है ?
 # साइंस मनुष्य के तर्क की उपज ही और कुदरत तर्कातीत है । 
# फिजिक्स में नोबेल पुरस्कार प्राप्त मैक्स प्लैंक का कहना है ," आज जब हम वैज्ञानिक मार्ग पर दो कदम आगे चल लेते हैं और पीछे मुड़ कर देखते हैं तब स्वयं को पहली स्थिति से दो कदम पीछे पाते हैं । 
<< जो दिमाक में आये , सोचो ।
 << जो चाहो ,वह करो । 
<> पर प्यारे ! अपनें को कुदरत का ही एक अंग समझो ।
 ~~~ ॐ ~~~

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