उनकी आखिरी बात थी ," क्या बताऊँ बेटा , अपनें जीवनका अनुभव और मेरे अनुभव से तुमको मिलेगा भी क्या , अभीं संसार तुमनें कदम ही तो रखा है ? सब्र रखो , धीरे - धीरे संसार तुमको भी डुबो लेगा और तुम्हे तब पता चलेगा कि तुम डूब चुके हो जब निकलनें के सभीं उपाय समाप्त हो चुके होंगे , यही एक गहरा राज गई ,इस संसार का ।
* इंसान आँखें बंद किये सारा जीवन गुजार देता है और जब उसकी आँखें खुलना चाहती है तब खुल नहीं पाती और वह बिचारा , तड़पता हुआ आखिरी श्वास भरता है ।
* जिसका कद दुनिया वालोंके लिए लम्बा दिखता
है ,उस बिचारेका वही कद उसके घर वालोंके लिए एक चीटी के कद से ज्यादा बड़ा नहीं होता । घर में उसकी श्वासें रुक -रुक कर चलती है और ज्योंही उसे मौक़ा मिलता है ,वह घर से बाहर निकल भागता है ।
* रामू काका ज्यादा तो बोल न सके पर जो बोल न सके , उसे उनकी चुप्पी ब्यक्त कर रही थी । * रामू काका बोलते -बोलते एकाएक चुप हो गए , हमें देखते रहे ,दो - एक घडी और हमेशाके लिए बंद हो रही उनकी आँखे दो बूँद आँसू टपकाते हुए सबकुछ कह गयी जिनको समझनें में ही जीवनका राज छिपा दिख रहा है ।
~~~ ॐ ~~~
Tuesday, November 18, 2014
दो बूँद आँसू
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यही तो जीवन है
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