विन्ध्याचल और कैमूर पहाड़ों के मध्य ,गंगा और सोन नदियों के मध्य बसा हुआ सोनभद्र जिला है । यह जिला मिर्ज़ापुर जिले का एक भाग हुआ करता था ।
* यह वह जगह है जहाँ लगता है प्रकृति पूर्ण रूप से इसी भू भाग पर उतरी हो , यहाँ परमात्मा सबकुछ दे रखा है लेकिन यह प्रकृति का आँचल राजनीति में बिष में धीरे - धीरे अपना रूप -रंग खोता जा रहा है ।
* यह वह क्षेत्र है जहाँ बच्चे बच्चों को पैदा कर रहे हैं और बूढ़े इज्जत बचाने में झुकते जा रहे हैं ।
* यह वह क्षेत्र है जिसकी तकदीर उपरवाले नें सोनें की कलम से लिखी थी पर सत्ताधारियों नें परमात्मा की लेखनी को बदल दिया ।
* यह वह जगह है जहाँ पालक से ज्यादा पान की पत्तियाँ बिकती हैं ।
* यहाँ राज नेता आते रहते हैं लेकिन सड़क मार्ग से नहीं हवाई मार्ग से क्योंकि जब वे यहाँ की प्यासी धरती माँ की कराह सुन न सके बस समझो की हवा की भाँति आये और गए ।
* कांग्रेस , भारतीय जनता पार्टी , समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सब लोगों को यहाँ की जनता सर पर बैठाई थी , अच्छे दिन की उम्मीद में पर यहाँ के दिन धीरे- धीरे अँधेरे में बदलते चले गए ।
<> अब यह कहा जा सकता है कि सारी दुनियाँ बदल सकती है पर सोनभद्र वैसे का वैसा बना रहेगा <>
~~~ ॐ ~~~
Saturday, November 22, 2014
यहभी एक जगह है
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सोनभद्र
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