जैन दर्शन में ज्ञान से अभिप्राय सम्यक्ज्ञान से है और यही प्रमाण है। जिस प्रकार से जीव एवं अजीव पदार्थ अवस्थित हैं, उस प्रकार से उसको जानना सम्यक् ज्ञान है।
Saturday, October 30, 2021
Saturday, October 23, 2021
बड़ा कठिन है समझना - समझना
शास्त्र के दो प्रकार हैं ; श्रुति और स्मृति ।
शास्त्रों से सत्य का बोध नहीं होता , सत्य को जानने की जिज्ञासा उठती है ।
Friday, October 22, 2021
भक्ति वैराग्य का फल है
भक्ति ..
भक्तिका माध्यम है ,भाव
और भक्ति - भाव ⤵️
● गुणसे निर्गुण...
● साकारसे निराकार...
एवं...
●मायासे ब्रह्ममें ...
★ पहुँचानेकी ऊर्जाका निर्माण - करता है ।
~~◆◆ ॐ◆◆~~22 अक्टूबर
Sunday, October 10, 2021
Saturday, October 9, 2021
Friday, October 8, 2021
सिद्धों की परंपरा में दर्शन कीजिये कुछ सिद्ध आत्माओं से
सिद्धों की परंपरा
~~◆◆ ॐ ◆◆~~
पश्चिम बंगाल का नादिया जनपद की धरती जिस पर ऊपर दिखाई गए सिद्ध योगियों का बचपन गुजरा । चैतन्य महा प्रभु
( 1486 - 1534 ) गौड़िय संप्रदाय की आधारशिला रखी और पूरे भारत में भक्ति - साधना की गंगा बहा दी ।
लाहिड़ी महाशय (1828 - 1895 ) क्रियायोग के अनेक सिद्ध योगियों को तैयार किये जिनमें योगानंद के गुरु श्रीयुक्तेश्वर गिरी भी हैं
~~◆◆ ॐ ◆◆~~
परमहंस रामकृष्ण और दक्षिणेश्वर काली माँ
~~◆◆ ॐ ◆◆~~
Wednesday, October 6, 2021
राग एक माध्यम है
राग वैराग्य की सीढ़ी है - जो लोग ऐसा समझ कर भोग की यात्रा कर रहे होते हैं , वे समझो योग की यात्रा पर हैं और एक दिन भोग को धन्यवाद् करके वैराग्य के आनंद में मस्त हो जाते हैं । वैराग्य की अलमस्ती उनको कैवल्य में पहुँचा देती है
Tuesday, October 5, 2021
Monday, October 4, 2021
सांख्य दर्शन का दर्शन - 1
सांख्य दर्शन भारतीय दर्शनों में प्राचीनतम दर्शन है लेकिन अब इस समय इसकी मात्र - 72 कारिकाएँ बची हुई हैं जो सूर्य की ऊर्जा रखती हैं ।
छोटी - छोटी स्लाइड्स के माध्यम से आप इन कारिकाओं से मिल सकेंगे , ऐसा कुछ प्रयास यहाँ किया जा रहा है ।
देखिये 72 कारिकाओं में आखिरी कुछ कारिकाओं के सार को और उसके साथ कारिकाओं की रचना के सम्बन्ध में भी आप देख सकते हैं 
Sunday, October 3, 2021
यादें आती तो हैं पर --
# बुद्ध पुरुष स्वप्न नहीं देखते
# जब स्वप्न देखते समय ऐसा लगने लगे कि मैं स्वप्न देख रहा हूँ , समझो प्रभु प्रसाद रूप में आपको बुद्धत्व मिल गया है ।
⚛️ प्रभु स्मृति की अनुपस्थिति में मनुष्य , मनुष्य नहीं रहता ।
💐 प्यार अविभाज्य है , इसे विभाजित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसी कोशिश न जीने देती है न मरने देती है ।
~~फिर मिलेंगे , प्रभु कृपा से ~~
Saturday, October 2, 2021
तनहा जीवन
जख्म मिटते नहीं लेकिन उसके दर्द को सहने के हम आदी हो जाते हैं।अपनों से मिले जख्म का दर्द भी अपना ही होता है जो शुरू में बहुत गहरा होता है लेकिन समय के साथ - साथ मिटता चला जाता है। क्या आप जानते हैं कि मुर्दे भी रोते हैं ! जी हाँ रोते हैं पर उनके रोने को देखने - समझने वाले उनके पास नहीं होते ।
पैसा अगर कंगाल कर दे तो वर्दाश्त हो जाता है लेकिन रिस्ते अगर कंगाल कर दें तो दिल फोड़े सी दर्द में डूब जाता है ।
यह जीवन भी एक गहरा राज है । लोगों की निगाह में हम भरे - पुरे हैं लेकिन अपनीं निगाह में जब हम स्वयं को देखते हैं तो देख नहीं पाते । देखने की हर कोशिश नाकामयाब रहती हैं क्योंकि आँखों का टपकना बंद ही नहीं होता ।
लोगों को सभीं देखते हैं लेकिन शायद ही हजारों में कोई एक मिले जिसके पास इतनी हिम्मत हो की वह स्वयं को देख सके। हम जो हैं , उसे हम स्वयं नहीं जानते लेकिन लोग यह तो जानते ही हैं कि हम कौन और कैसे हैं और इसके अलावा और बहुत सी बातों को जानते हैं जिनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते ।
इस संसार में अकेला कोई नहीं रहना चाहता लेकिन समय कब और कैसे किसी को अकेले रहने के लिए बाध्य कर दें , कोई नहीं जानता। साथ रहने में हम खुश नहीं और तनहा जीवन को एक श्राप समझते हैं - यह कैसी हमारी सोच है ? हम कहीं टिकते क्यों नहीं । साथी की तलाश सब को है लेकिन साथ निभाने की सोच वाले बहुत कम हैं।
सांसों की गिनती पर यह जीवन टिका है और उलटी गिनती गर्भ में आते ही शुरू हो जाती है । कब और कहाँ , यह उलटी गिनती समाप्त हो जाय , आज तक इस कुदरती राज को कोई नहीं जान पाया। जहाँ बुद्धि की सीमा समाप्त होती है वहाँ से नसीब की सीमा शुरू होती है।
मनुष्य की जीवन - यात्रा अपनें में एक रहस्य है ; इस यात्रा में हम कभीं मिलते हैं , कभीं जुड़ा होते हैं , कभीं रोते हैं और कभीं हँसते भी हैं और इनसे गुजरते - गुजरते एक दिन स्वयं गुजर जाते हैं ।
// क्रमश अगले अंक में ~~~









