● भूख चाहे पेट की हो या काम की , यह मनुष्य को जानवर बना सकती है ।
° जंगल में किसी के बनाए नियम नहीं चलते ,वहाँ के नियम प्रकृतिके नियम हैं जहाँ न कोई अपना है न पराया ,सब प्रकृतिके नियमका पालन कर रहे हैं और उनको इसके करनें में कोई दिक्कत भी नहीं ।
° जंगल में जो हैं उनके अन्दर कभीं यह बात नहीं आयी कि अमुक नियम अब पुराना हो चूका है ,अव उसमें सुधार की जरुरत है । सृष्टिके प्रारम्भ से आज तक प्रकृति जो नियम चला रही है , सब उस नियम के आधार पर जी रहे हैं , उन्हें कोई आपति नहीं ।
* प्राचीन युगों में जब मनुष्य में ज्ञान की ऊर्जा बहनें लगती थी तब वह देर नहीं करता था ,चाहे वह राजा हो या रंक , तुरंत उसका मुह जंगल की ओर हो जाता था , जानते हैं ऐसा क्यों होता था ? क्योंकि जंगल में जो घटित होता है , वह प्रकृतिके अनुकूल होता है और बस्ती में जो घटित होता है वह मनुष्य के भोग बुद्धि पर आधारित होता है ।प्रकृति निर्मित नियम परम सत्य के नियम हैं , मनुष्य द्वारा निर्मित नियम सत्य आधारित नहीं तर्क आधारित होते हैं और तर्क संदेह आधारित है ।
* Logic यानी तर्क आज के विज्ञान की जननी है ; जितना गहरा तर्क होगा , इससे उतना गहरा विज्ञान निकलता है । आज का युग तर्क का युग है ,आज तर्क शास्त्री हर क्षेत्र में ऊपर हैं । तर्क अर्थात संदेह ,जितना गहरा संदेह होगा , उतना गहरा विज्ञान उससे विज्ञानं निकलेगा और जब संदेह भ्रान्ति में बदल जाता है तब विज्ञानके मजबूत नियम निकलते हैं । * जंगल में प्रकृति है और प्रकृति में जंगल हैं जहाँ प्रकृति और उसके नियम स्पष्ट दिखते हैं । प्रकृति को देखना मनुष्य को द्रष्टा बनानें में सहयोग करती है और प्रकृति का द्रष्टा ब्रह्ममय होता है ।
* अब आप सोचिये कि जंगल राज्यके सम्बन्ध में आप की अपनी सोच क्या है ?
~~ ॐ ~~
Tuesday, July 22, 2014
जंगल राज्य
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जंगल और प्रकृति
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