<> मैं उनसे बोल था ; आप आये हो ,अच्छी बात है। लेकिन कुछ ऐसा न बोल देना कि मैं रो पडू ।क्योंकि पिछले 16 सालसे ये आँसू बहते ही रहे हैं चाहे कोई इन्हें देखा हो या न देखा हो ।ये अब कुछ दिनों से बंद
हैं , क्या पता , ये क्यों बंद हैं ?
पर वे कहाँ चुप रहनें वाले ?
# वे अपनीं आदत से लाचार हैं
* और
# मैं अपनें हृदयका गुलाम हूँ ।
** मेरी मजबूरी एक पल भी चैन की श्वास नहीं भरनें देती और उनकी मजबूरी दुसरे को रुला कर उनके दिलको ठंढ़क
पँहुचाती है ।
~~ हे राम ~~
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