Wednesday, September 3, 2014

भीगे नैना -1

<> मैं उनसे बोल था ; आप आये हो ,अच्छी बात है। लेकिन कुछ ऐसा न बोल देना कि मैं रो पडू ।क्योंकि पिछले 16 सालसे ये आँसू बहते ही रहे हैं चाहे कोई इन्हें देखा हो या न देखा हो ।ये अब कुछ दिनों से बंद हैं , क्या पता , ये क्यों बंद हैं ? पर वे कहाँ चुप रहनें वाले ? 
# वे अपनीं आदत से लाचार हैं 
 * और 
# मैं अपनें हृदयका गुलाम हूँ ।
 ** मेरी मजबूरी एक पल भी चैन की श्वास नहीं भरनें देती और उनकी मजबूरी दुसरे को रुला कर उनके दिलको ठंढ़क
 पँहुचाती है ।
 ~~ हे राम ~~

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