Saturday, November 22, 2014

यहभी एक जगह है

विन्ध्याचल और कैमूर पहाड़ों के मध्य ,गंगा और सोन नदियों के मध्य बसा हुआ सोनभद्र जिला है । यह जिला मिर्ज़ापुर जिले का एक भाग हुआ करता था ।
* यह वह जगह है जहाँ लगता है प्रकृति पूर्ण रूप से इसी भू भाग पर उतरी हो , यहाँ  परमात्मा सबकुछ दे रखा है लेकिन यह प्रकृति का आँचल राजनीति में बिष में धीरे - धीरे अपना रूप -रंग खोता जा रहा है ।
* यह वह क्षेत्र है जहाँ बच्चे बच्चों को पैदा कर रहे हैं और बूढ़े इज्जत बचाने में झुकते जा रहे हैं ।
* यह वह क्षेत्र है जिसकी तकदीर उपरवाले नें सोनें की कलम से लिखी थी पर  सत्ताधारियों नें परमात्मा की लेखनी को बदल दिया ।
* यह वह जगह है जहाँ पालक से ज्यादा पान की पत्तियाँ बिकती हैं ।
* यहाँ राज नेता आते रहते हैं लेकिन सड़क मार्ग से नहीं हवाई मार्ग से क्योंकि  जब वे यहाँ की प्यासी धरती माँ की कराह सुन न सके बस समझो की हवा की भाँति आये और गए ।
* कांग्रेस ,  भारतीय जनता पार्टी , समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सब लोगों को यहाँ की जनता सर पर बैठाई थी , अच्छे दिन की उम्मीद में पर यहाँ के दिन धीरे- धीरे अँधेरे में बदलते चले गए ।
<> अब यह कहा जा सकता है कि  सारी दुनियाँ बदल सकती है पर सोनभद्र वैसे का वैसा बना रहेगा <>
~~~ ॐ ~~~

Tuesday, November 18, 2014

दो बूँद आँसू

उनकी आखिरी बात थी ," क्या बताऊँ बेटा , अपनें जीवनका अनुभव और मेरे अनुभव से तुमको मिलेगा भी क्या , अभीं संसार तुमनें कदम ही तो रखा है ? सब्र रखो , धीरे - धीरे संसार तुमको भी डुबो लेगा और तुम्हे तब पता चलेगा कि तुम डूब चुके हो जब निकलनें के सभीं उपाय समाप्त हो चुके होंगे , यही एक गहरा राज गई ,इस संसार का ।
* इंसान आँखें बंद किये सारा जीवन गुजार देता है और जब उसकी आँखें खुलना चाहती है तब खुल नहीं पाती और वह बिचारा , तड़पता हुआ आखिरी श्वास भरता है ।
* जिसका कद दुनिया वालोंके लिए लम्बा दिखता
है ,उस बिचारेका वही कद उसके घर वालोंके लिए एक चीटी के कद से ज्यादा बड़ा नहीं होता । घर में उसकी श्वासें रुक -रुक कर चलती है और ज्योंही उसे मौक़ा मिलता है ,वह घर से बाहर निकल भागता है ।
* रामू काका ज्यादा तो बोल न सके पर जो बोल न सके , उसे उनकी चुप्पी ब्यक्त कर रही थी । * रामू काका बोलते -बोलते एकाएक चुप हो गए , हमें देखते रहे ,दो - एक घडी और हमेशाके लिए बंद हो रही उनकी आँखे दो बूँद आँसू टपकाते हुए सबकुछ कह गयी जिनको समझनें में ही जीवनका राज छिपा दिख रहा है ।
~~~ ॐ ~~~