Tuesday, July 22, 2014

जंगल राज्य

● भूख चाहे पेट की हो या काम की , यह मनुष्य को जानवर बना सकती है ।
° जंगल में किसी के बनाए नियम नहीं चलते ,वहाँ के नियम प्रकृतिके नियम हैं जहाँ न कोई अपना है न पराया ,सब प्रकृतिके नियमका पालन कर रहे हैं और उनको इसके करनें में कोई दिक्कत भी नहीं ।
° जंगल में जो हैं उनके अन्दर कभीं यह बात नहीं आयी कि अमुक नियम अब पुराना हो चूका है ,अव उसमें सुधार की जरुरत है । सृष्टिके प्रारम्भ से आज तक प्रकृति जो नियम चला रही है , सब उस नियम के आधार पर जी रहे हैं , उन्हें कोई आपति नहीं ।
* प्राचीन युगों में जब मनुष्य में ज्ञान की ऊर्जा बहनें लगती थी तब वह देर नहीं करता था ,चाहे वह राजा हो या रंक , तुरंत उसका मुह जंगल की ओर हो जाता था , जानते हैं ऐसा क्यों होता था ? क्योंकि जंगल में जो घटित होता है , वह प्रकृतिके अनुकूल होता है और बस्ती में जो घटित होता है वह मनुष्य के भोग बुद्धि पर आधारित होता है ।प्रकृति निर्मित नियम परम सत्य के नियम हैं , मनुष्य द्वारा निर्मित नियम सत्य आधारित नहीं तर्क आधारित होते हैं और तर्क संदेह आधारित है ।
* Logic यानी तर्क आज के विज्ञान की जननी है ; जितना गहरा तर्क होगा , इससे उतना गहरा विज्ञान निकलता है । आज का युग तर्क का युग है ,आज तर्क शास्त्री हर क्षेत्र में ऊपर हैं । तर्क अर्थात संदेह ,जितना गहरा संदेह होगा , उतना गहरा विज्ञान उससे विज्ञानं निकलेगा और जब संदेह भ्रान्ति में बदल जाता है तब विज्ञानके मजबूत नियम निकलते हैं । * जंगल में प्रकृति है और प्रकृति में जंगल हैं जहाँ प्रकृति और उसके नियम स्पष्ट दिखते हैं । प्रकृति को देखना मनुष्य को द्रष्टा बनानें में सहयोग करती है और प्रकृति का द्रष्टा ब्रह्ममय होता है ।
* अब आप सोचिये कि जंगल राज्यके सम्बन्ध में आप की अपनी सोच क्या है ?
~~ ॐ ~~

Monday, July 14, 2014

दो शब्द

** आँखें - भाग - 1 ** 
● दो बातें जो यहाँ नीचे दी जारही हैं उनको ध्यानसे समझें :--- 1-<> मनुष्यकी आँखे उसके अन्दर छिपे भाव सागरके द्वार हैं । 2 -<> मनुष्य की आँखे उसके हृदय के द्वार हैं । 
^^ ऊपर दी गयी दो बातों में दम है और इनकी समझ बुद्धि - योगमें प्रवेश कराती है , कैसे ? देखते हैं यहाँ इन दो बिषयों को ? <> क्या है ,बुद्धि योग ? <> 
* गीता - 2.49 के माध्यम से प्रभु कृष्ण अर्जुन को कह रहे हैं :-# बुद्धि योग से कर्म निम्न श्रेणीका है अतः तुम बुद्धि योग की शरण में पहुँचो ।गीता को कर्म योगका आधार समझा जाता है और कृष्ण यहाँ उसे निम्न स्तरका कह रहे हैं , कुछ देर यहाँ रुकें और इस बात की जड़ को बुद्धि माध्यम से समझें ........ । 
* अर्जुन मोह ग्रसित है और मोह में बुद्धि चालाक बन जाती है । बुद्धि बचाव केलिए कोई कसर नहीं छोडती।अर्जुन प्रभुकी इस वात को सुन कर चुप रहते हैं और तीसरे अध्याय के प्रारम्भ में जाकर अर्जुन पुनः ( गीता -3.1 ) इस बात के सन्दर्भ में पूछते
 हैं , " यदि कर्म से उत्तम बुद्धि है तो आप मुझे कर्म के लिए क्यों प्रेरित कर रहे हैं ? " ऊपर ऊपर से देखनें पर अर्जुन का प्रश्न स्वाभाविक दिखता है । 
* आँख से टपकते आँसूओं के दो श्रोत होते हैं , एक श्रोत है मोह और दूसरा श्रोत है भक्ति । 
* मोह और भक्तिकी आँसुओंके सम्वन्ध में देखेगें अगले अंक में । ~~ ॐ ~~