Wednesday, October 7, 2015
Tuesday, September 22, 2015
ध्यान
" अपनें अंदर अपनें मूल पर पहुँचना , ध्यान है '
योगिराज , योगानंदजीके क्रियायोग गुरु पूज्यनीय योग गुरु महाशय जी महाराज , काशी को समर्पित हो कर ध्यान की गहराई में उतरते चले जाए ।
एक दिन वह घडी आ ही जाएगी जब आपकी उंगली परम योगिराज के हाँथ में होगी और आप परम शून्यता की गहराई में होंगे ।
Thursday, August 20, 2015
वह आएगा
शायद आज ?
थे एक बुजुर्ग , लगभग 70-75 साल के ।
मैं उनके जीवनसे परिचित तो था लेकिन इधर लगभग 25 सालसे एक दूसरेके आमने -सामने होनेंका मौक़ा न मिल सका था । वे जिस बस्ती में रहते थे , उस बस्तीका मेरा सम्बन्ध बचपन से है ।
एक दिन मेरा वहाँ उस बस्ती में जाना हुआ और सुबह-सुबह मैं उनसे मिलना भी चाहा पर उनके मकानका ठीक - ठीक पता न होनें से कुछ दिक्कत जरूर हो रही थी पर किसीकी मदद से उनके घर पहुँच ही गया ।
लगभग 25 साल बाद हम दोनों मिल रहे थे पर उनके ब्यवहार से ऐसा नहीं लगा कि उनके घर सुबह - सुबह उनका कोई नजदीकी मित्र आया हुआ है ।
लगभग 40 मिनट बात वे दो कप चाय ले कर मेरे पास आये और चाय पीनें की बात कही । मैं उनके ब्यवहारसे नाराज तो न था पर उनको पढ़ जरूर रहा था । उनके देखनें से ऐसा नहीं लग रहा था कि वे मुझे जानते भी हैं ।
ज़रा सी चाय पीते और फिर मोबाइल खोल कर देखते ।
जब हम दोनों चाय पी चुके तब मुझसे रहा न गया और मैं पूछ बैठा कि आप हर पल मोबाइल क्यों देख रहे हो , किसी का फोन आना है , क्या ? वे गंभीर हो कर बोले ,हाँ ,मेर बेटे का । मैं पूछा , बेटा कहाँ है ? वे बोले अमेरिका में ।
खैर ! मुझे वे एक सामान्य ब्यक्ति तो लगे नहीं ,पर मैं बोला ,अब चलता हूँ ,फिर आऊँगा पर वे कुछ न बोलेऔर मैं चला आया ।
ज्योंही बाहर निकाला ,जो मिलता ,वही हँसकर पूछता कि क्या बात हुयी । मुझे ऐसा लगा जैसे लोग उस ब्यक्तिको हीन भाव से देख रहे हों । जब मैं लोगोंके ब्यवहार से थक सा गया ,तब मुझसे रहा न गया और मैं एक सज्जन से पूछ बैठा कि बात क्या है ?
वे बोले , बात कुछ नहीं है ,वे दिमाकी तौर पर कुछ कमजोर हो चुके हैं । मैं तो घबड़ा सा गया और बोला कि भाई बात क्या है ,वे तो बहुत प्यारे ब्यक्ति थे ,उनके साथ ऐसी कौन सी घटना घटी कि अपना मांसिक सन्तुलन खो बैठे ?
बाद में मुझे पता चला कि उनका बेटा अमेरिकंमें रहता है और 25 साल पहले यहाँ से गया था । दो साल बाद यहाँ आया था और फिर न स्वयं आया और न कोई फोन आया।
आज से 5 साल पहले जब इनकी पत्नी गुजरी तबतक तो ये ठीक थे ,पर बाद में इनकी हालात खराब होती गयींऔर आज ये हर पल अपनें पुत्र की राह देखते रहते हैं । घर में अगर जोई कुत्ता - बिल्ली की भी आहट मिल जाय तो फ़ौरन बाहर निकल आते हैं की बेटा आया होगा ।
बीबी का जुदा होना ,वे बर्दास्त कर गए
पर
बेटेकी जुदाई
उनको चलता फिरता मुर्दा जरूर बना गयी।
~~ॐ ~~
Saturday, August 1, 2015
प्याला
जिस प्यालेनें
भरी मुहब्बत ,
वह प्याला कैसे
रूठ गया ?
जिस प्याले के,दम पर मैं ,
दिन - रात अकेले ,चलता था ।
वह प्याला ,मेरे दिल का प्याला ,
Friday, July 31, 2015
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