Saturday, January 8, 2022
Sunday, January 2, 2022
स्त्री
स्त्री
# मर्द की गतिविधियाँ औरत के इशारे पर चलती है लेकिन इस सत्य को कोई पुरुष मानने को तैयार नहीं ।
जो अपनीं पत्नी का गुलाम नहीं , उनका दाम्पत्य जीवन दूसरों को चाहे जैसा दिखे लेकिन उनके लिए बोझ सा रहता है और जो गुलाम हैं , उन्जे दाम्पत्य जीवन अंदर से खोखला और बहार से पूर्ण सा भाषता है । दिल से जो लोग अपनीं - अपनीं पत्नियों की गुलामी स्वीकार कर लेते हैं उनकी जीवन यात्रा सीधी रेखा में चलती रहती है लेकिन उसकी दिशा के संबंध में कुछ कहाँ नहीं जा सकता क्योंकि औरत की सोच केवल और केवल अपनें स्वार्थ तक सीमित होती है ।
श्रीमद्भगवत पुराण में निम्न बात दो बार कही गयी है , आप भी ध्यान से इसे समझें और इस पर सोचें ⤵️
भागवत पुराण : 6.18 + 9.14
स्त्री किसी से मित्रता नहीं करती । उसका हृदय भेड़िए के हृदय जैसा होता है । वह अपनीं लालसा - पूर्ति हेतु कुछ भी कर सकती है । वह अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए , पिता , पति , भाई और पुत्र को मार या मरवा भी सकती है।
~~ ●● ॐ ●●~~
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