Tuesday, September 22, 2015

ध्यान

" अपनें अंदर अपनें मूल पर पहुँचना , ध्यान है ' योगिराज , योगानंदजीके क्रियायोग गुरु पूज्यनीय योग गुरु महाशय जी महाराज , काशी को समर्पित हो कर ध्यान की गहराई में उतरते चले जाए । एक दिन वह घडी आ ही जाएगी जब आपकी उंगली परम योगिराज के हाँथ में होगी और आप परम शून्यता की गहराई में होंगे ।