" अपनें अंदर अपनें मूल पर पहुँचना , ध्यान है '
योगिराज , योगानंदजीके क्रियायोग गुरु पूज्यनीय योग गुरु महाशय जी महाराज , काशी को समर्पित हो कर ध्यान की गहराई में उतरते चले जाए ।
एक दिन वह घडी आ ही जाएगी जब आपकी उंगली परम योगिराज के हाँथ में होगी और आप परम शून्यता की गहराई में होंगे ।