Thursday, December 18, 2014

भक्ति का नशा या नशे में भक्ति

भक्तिका नशा या नशे की भक्ति
* ऐसी लागी लगन ,मीरा हो गयी मगन...
* हरी -हरी हरी गुण गानें लगी ...
श्री अनूप जलोटाजीका इस तरह का भजन भक्तिके नशेका चित्रण करता है ।
** और **
आये दिन शिव रात्रि , होली ,दिवाली और दशहराके मनाये जा रहे उत्सवोंकी झांकियों में आप अपनी स्थितिको भी देखते ही होंगे जो चन्द घड़ियोंकी उम्र ले कर आता है , यह है नशें में भक्ति का चित्रण । मीरा मथुरा से द्वारका तक पैदल गाती हुयी और नाचती हुयी अपनीं मस्ती में चलती रही , एक तूफ़ानकी भाँति ,एक चक्रवातकी तरह । जो भी मीराके उर्जा क्षेत्र में आया ,मीरा बन गया , जिसके पीठ पीछे कहीं दूर रह गया ,यह माया मोहित संसार और कन्हैयाकी ऊर्जा में डूबा वह भक्ति के नशे में मायातीत एवं कालातीत हो गया ।
* भक्तिकी नशा में डूबा यह नहीं पूछता ,अपनें साथी से कि भाई ! टाइम क्या हुआ होगा ? और नशेकी भक्तिका नकली भक्त बार -बार अपनीं घडी देखता रहता है ।
*भक्ति का नशा देखनें वाले दुर्लभ हैं और नशे की भक्ति वालों से यह संसार रसातल की ओर सरकता जा रहा है ।
~~ ॐ ~~

Wednesday, December 10, 2014

क्या कर रहे हैं ?

सुलझी हुयी गुत्थीको कहीं
उलझा तो नहीं रहे ?
लोगों को दबानें में कहीं
खुद तो नहीं दबाते जा रहे ?
सोनें के सिंघासन की सोच में
कहीं अपनीं खाट को तो नहीं भूल रहे ?
लोगोंकी नक़ल करते -करते
कहीं स्वयं को तो नहीं भूलते जा रहे ?
~~ हर हर महादेव ~~